Thursday, April 18, 2013

http://www.thehindu.com/todays-paper/kidnapped-girl-found-brutalised/article4632313.ece




दोस्तों आजकल हर दिन अख़बार उठाने पर दो-तीन बलात्कार की घटनाओं की खबरें रहती ही हैं और आज मुझे महसूस हुआ की धीरे-धीरे हम इन खबरों के प्रति कम संवेदनशील होते जा रहे हैं.
क्योंकि आज जब मैं अख़बार का पहला पन्ना ही ही पढ़ रहा था, इस एक खबर ने दिलोदिमाग को हिला कर रख दिया .... दो मिनट के लिए तो मैं पता नहीं किस लोक में चला गया था....
मासूम-अबोध बच्चियां...जिन्हें पहले तो कोख में ही ख़त्म कर देने की कोशिश की जा रही हैं....और जो संयोगवश बाख जा रही हैं....उन्हें जन्म के बाद से ही "मानव" रुपी दैत्यों  (जानवर शब्द का भी इनके लिए प्रयोग उचित नहीं लगता, क्योंकि जानवरों में भी इतनी संवेदना ये होती है कि वे अपने बच्चों के कम से कम ऐसा नहीं करते....)  की दरिंदगी का खतरा......
लेकिन यहाँ तो हैवानियत की सारी हदें पार हो गई हैं.....मुझे शर्म है कि मैं भी इसी समाज का हिस्सा हूँ.....
और इस बात का दर भी है कि ऐसी घटनाओं को देखते-सुनते रहने कि आदत न पड़ जाए.....
मानव अधिकार के लिए काम करने वाले साथियों...कृपया ऐसे हैवानों के मामले में 'मानव अधिकार' की बात मत करना......

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